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📖 Katha Vishnu
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Brihaspativar Vrat Katha Complete

Language:
बृहस्पतिवार व्रत कथा संपूर्ण
॥ श्री बृहस्पतिवार व्रत कथा ॥ प्राचीन समय की बात है। एक नगर में एक अत्यंत धनवान व्यापारी रहता था। उसके पास धन, वैभव, नौकर-चाकर और सुख-सुविधाओं की कोई कमी नहीं थी। उसकी पत्नी बहुत धार्मिक और भगवान विष्णु तथा बृहस्पति देव की परम भक्त थी। वह प्रत्येक गुरुवार को व्रत रखती, पीले वस्त्र धारण करती, केले के वृक्ष की पूजा करती और ब्राह्मणों को भोजन कराती थी। व्यापारी को यह सब बिल्कुल अच्छा नहीं लगता था। वह अपनी पत्नी से कहता — “इन व्रत-पूजाओं से कुछ नहीं होता। धन केवल मेहनत और व्यापार से मिलता है।” लेकिन उसकी पत्नी शांत स्वभाव से भगवान की भक्ति करती रही। समय बीतता गया। धीरे-धीरे व्यापारी के जीवन में परिवर्तन आने लगा। उसका व्यापार घाटे में जाने लगा। जहाज समुद्र में डूब गए, व्यापारिक साझेदार धोखा देने लगे और घर का धन समाप्त होने लगा। कुछ ही वर्षों में वह अत्यंत निर्धन हो गया। अब घर की स्थिति इतनी खराब हो गई कि भोजन के लिए भी संघर्ष करना पड़ता था। लेकिन व्यापारी की पत्नी ने गुरुवार का व्रत नहीं छोड़ा। वह पीले वस्त्र पहनकर केले के वृक्ष के नीचे दीपक जलाती और भगवान विष्णु का ध्यान करती। एक दिन भगवान बृहस्पति देव साधु का वेश धारण करके उनके घर आए। उस समय घर में खाने के लिए केवल थोड़ा सा चना और जल था। व्यापारी की पत्नी ने श्रद्धा से वही भोजन साधु को अर्पित किया। साधु उसकी सेवा और भक्ति से अत्यंत प्रसन्न हुए। उन्होंने कहा — “बेटी, तुम्हारी श्रद्धा और सेवा देखकर मैं प्रसन्न हूँ। शीघ्र ही तुम्हारे घर में सुख और समृद्धि लौट आएगी।” इतना कहकर वे अदृश्य हो गए। तब स्त्री समझ गई कि वे स्वयं बृहस्पति देव थे। अगले ही दिन से चमत्कार होने लगे। व्यापारी को पुराने व्यापार से लाभ मिलने लगा। उसके खोए हुए धन का समाचार मिला। घर में फिर से सुख-समृद्धि आने लगी। लेकिन व्यापारी अब भी पूरी तरह भगवान पर विश्वास नहीं करता था। कुछ समय बाद व्यापारी को दूसरे नगर व्यापार के लिए जाना पड़ा। जाते समय उसकी पत्नी ने कहा — “गुरुवार के दिन बाल न कटवाना, कपड़े न धोना और पीली वस्तुओं का अपमान न करना।” लेकिन व्यापारी ने उसकी बातों को महत्व नहीं दिया। गुरुवार के दिन उसने दाढ़ी बनवाई, कपड़े धुलवाए और व्यापार में छल-कपट किया। उसी दिन उसका सारा धन चोरी हो गया और उसे भारी नुकसान उठाना पड़ा। वह दुखी होकर घर लौट आया। पत्नी ने उसे समझाया कि गुरुवार का व्रत नियम और श्रद्धा से करना चाहिए। व्यापारी को अपनी गलती का एहसास हुआ। उसने भी भगवान विष्णु और बृहस्पति देव का व्रत आरंभ कर दिया। अब पति-पत्नी दोनों श्रद्धा से गुरुवार का व्रत करने लगे। वे गरीबों को भोजन कराते, पीले वस्त्र दान करते और भगवान विष्णु की कथा सुनते। धीरे-धीरे उनके जीवन से सभी कष्ट दूर हो गए। घर धन-धान्य से भर गया और परिवार सुखपूर्वक रहने लगा। एक दिन भगवान विष्णु और बृहस्पति देव ने स्वप्न में दर्शन देकर कहा — “जो व्यक्ति श्रद्धा और नियम से गुरुवार का व्रत करेगा, उसके जीवन में कभी धन, सुख और सम्मान की कमी नहीं होगी।” तभी से बृहस्पतिवार व्रत की परंपरा प्रचलित हुई। यह व्रत विशेष रूप से धन, वैवाहिक सुख, संतान प्राप्ति और परिवार की समृद्धि के लिए किया जाता है। ॥ व्रत विधि ॥ प्रत्येक गुरुवार प्रातः स्नान करके पीले वस्त्र धारण करें। भगवान विष्णु और बृहस्पति देव की प्रतिमा स्थापित करें। हल्दी, चने की दाल, पीले फूल और केले अर्पित करें। घी का दीपक जलाकर व्रत कथा पढ़ें। केवल पीले भोजन का सेवन करें। नमक रहित भोजन करना श्रेष्ठ माना जाता है। ॥ व्रत के नियम ॥ गुरुवार के दिन बाल, दाढ़ी और नाखून नहीं काटने चाहिए। कपड़े धोना और घर में कलह करना अशुभ माना जाता है। केले के वृक्ष की पूजा विशेष फलदायी मानी जाती है। ॥ व्रत का महत्व ॥ जो व्यक्ति श्रद्धा और विश्वास से बृहस्पतिवार का व्रत करता है, उसे भगवान विष्णु और गुरु बृहस्पति की कृपा प्राप्त होती है। उसके जीवन में ज्ञान, धन, संतान सुख और वैवाहिक सुख की वृद्धि होती है। ॥ श्री बृहस्पतिवार व्रत कथा समाप्त ॥
Brihaspativar Vrat Katha Complete
Complete Brihaspativar Vrat Katha with vrat vidhi, rules, significance and blessings of Lord Vishnu and Brihaspati Dev.