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🙏 चालीसा Saraswati
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सरस्वती चालीसा संपूर्ण

Saraswati Chalisa Complete
भाषा:
सरस्वती चालीसा संपूर्ण
॥दोहा॥ जनक जननि पद कमल रज, निज मस्तक पर धारि । बन्दौं मातु सरस्वती, बुद्धि बल दे दातारि ॥ जय श्री सकल बुद्धि बलरासी । जय सर्वज्ञ अमर अविनाशी ॥ जय जय जय वीणाकर धारी । करती सदा सुहंस सवारी ॥ रूप चतुर्भुज धारी माता । सकल विश्व अन्दर विख्याता ॥ जग में पाप बुद्धि जब होती । धर्म की फीकी पड़ती ज्योति ॥ तब ही मातु का निज अवतारी । पाप हीन करती महतारी ॥ वाल्मीकि जो थे हत्यारा । तव प्रसाद जानै संसारा ॥ रामायण जो रचे बनाई । आदि कवि की पदवी पाई ॥ कालिदास जो भए विख्याता । तेरी कृपा दृष्टि से माता ॥ तुलसी सूर आदि विद्वाना । भए और जो ज्ञानी नाना ॥ तिन्ह न और रहेउ अवलम्बा । केवल कृपा आपकी अम्बा ॥ करहु कृपा सोई मातु भवानी । दुखित दीन निज दासहि जानी ॥ पुत्र करहिं अपराध बहूता । तेहि न धरइ चित सुन्दर माता ॥ राखु लाज जननी अब मेरी । विनय करौं भाँति बहु तेरी ॥ मैं अनाथ तेरी अवलम्बा । कृपा करउ जय जय जगदम्बा ॥ मधुकैटभ जो अति बलवाना । बाहुयुद्ध विष्णु से ठाना ॥ समर हजार पाँच में घोरा । फिर भी मुख उनसे नहिं मोरा ॥ मातु सहाय कीन्ह तेहि काला । बुद्धि विपरीत करी खलहाला ॥ तेहि ते मृत्यु भई खल केरी । पुरवहु मातु मनोरथ मेरी ॥ चण्ड मुण्ड जो थे विख्याता । क्षण महुँ संहारे उन माता ॥ रक्तबीज से समरथ पापी । सुर मुनि हृदय धरा सब काँपी ॥ काटेउ सिर जिमि कदली खम्बा । बारम्बार बिनवउँ जगदम्बा ॥ जग प्रसिद्ध जो शुम्भ निशुम्भा । क्षण में बाँधे ताहि तू अम्बा ॥ भरत मातु बुद्धि फेरेऊ जाई । रामचन्द्र बनवास कराई ॥ एहि विधि रावण वध तुम कीन्हा । सुर नर मुनि सबको सुख दीन्हा ॥ को समरथ तव यश गुन गाना । निगम अनादि अनन्त बखाना ॥
Saraswati Chalisa Complete
Complete Saraswati Chalisa dedicated to Goddess Saraswati for wisdom, education and knowledge.