काली चालीसा संपूर्ण
॥दोहा॥
जयकाली कलिमलहरण, महिमा अगम अपार ।
महिष मर्दिनी कालिका, देहु अभय अपार ॥
जयति जयति जय काली माता ।
करहु कृपा सब पर जगदाता ॥
रूप भयंकर जब तुम धारा ।
दुष्ट दलन कीन्हा संसारा ॥
रक्तबीज जब रण में आया ।
देव समाज बहुत घबराया ॥
तब तुम रूप विकराल बनाई ।
क्षण में दानव सेना खाई ॥
महिषासुर नृप अति अभिमानी ।
जेहि अघ भार मही अकुलानी ॥
रूप कराल कालिका धारा ।
सेन सहित तुम तिहि संहारा ॥
शुम्भ निशुम्भ दानव तुम मारे ।
रक्तबीज संहारे ॥
काली रूप धरि जगमग कीन्हा ।
भक्तन को सब सुख तब दीन्हा ॥
मुण्डमाल गल सोहत माता ।
देखि काल डर मानत भ्राता ॥
खड्ग खप्पर कर में राजै ।
दुष्ट दलन करि सब सुख साजै ॥
भक्तन हेतु दया तुम धारी ।
संकट हरण मंगलकारी ॥
जो जन ध्यान तुम्हारो लावै ।
भवसागर से पार उतरावै ॥
संकट काटो हे जगदम्बा ।
राखो लाज हमारी अम्बा ॥
दीन दुखी पर कृपा दिखाई ।
मन इच्छा सब पूर्ण कराई ॥
जय जय जय माँ कालिके ।
भक्तन हित वरदायिके ॥
Kali Chalisa Complete
Complete Kali Chalisa dedicated to Goddess Kali for protection, strength and destruction of evil.