सूर्य चालीसा संपूर्ण
॥दोहा॥
श्री रवि हरहु तेज अज्ञान ।
सुनहु विनय मोर भगवान ॥
जय जय जय रविदेव दयाला ।
करहु सदा भक्तन प्रतिपाला ॥
सप्त अश्व रथ अति मनभावन ।
तेज पुंज दिनकर जग पावन ॥
अरुण सारथी आगे आगे ।
निरखत लोक रहे अनुरागे ॥
कंचन वर्ण शरीर सुहावन ।
दिव्य किरण जग जीवन दावन ॥
नमो नमो हे विश्व प्रकाशा ।
सकल सृष्टि के तुम हो आशा ॥
रोग शोक सब दूर भगावो ।
भक्तन को सुख सम्पत्ति दावो ॥
आदित्य हृदय जो नर गावै ।
सकल मनोरथ सिद्धि पावै ॥
जो जन ध्यान तुम्हारो लावै ।
जीवन सफल सदा हो जावै ॥
Surya Chalisa Complete
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